Wednesday, 31 December 2014

नया साल मुबारक



         समय ऐसी सतत धारा है जिसमें जीवन अबाध गति से बहता रहता है। इसे न तो कोई बांध सका और ना रोक। हाँ दिन,महीने,साल ऐसे पड़ाव ज़रूर हैं जो आपको ये सुविधा देते हैं कि क्षण भर रूक सकें और देख सकें कि आपकी ज़िंदगी कहाँ पहुँच गई है,उसने कैसा रंग-रूप,आकार ओढ़ लिया है,क्या थी,क्या हो गई है। और आप जब भी इस बारे में सोचते हैं तो आपको लगता है कि ये आपका वर्तमान ही है जो सबसे कठिन समय से गुज़र रहा है। आपका बीता कल आपका सबसे अच्छा समय था। जैसे जैसे आप जीवन में आगे बढ़ते हैं वैसे ही आपका सफर कठिन से कठिनतर होता चला जाता है,संघर्ष सघन होते जाते हैं, चुनौतियाँ महती होती जाती हैं,विरोधी शक्तियाँ बढ़ती जाती हैं। आपको अपना समय सबसे कठिन लगने लगता है। आपको लगता है कि आपका समय घोर अनास्था और संकट का समय है।पर शायद ये हर दौर का सच है। लेकिन हर दौर में बहुत कुछ बल्कि बहुत अधिक सकारात्मक भी होता है जो जीवन को आगे बढ़ाता है। आपके शत्रुओं के बीच कुछ ऐसे मित्र आपके साथ होते हैं जिनके सहारे आप उन्हें बेमानी कर पाते हैं। आपके साथ कुछ ऐसे अपने होते हैं जो आपके जीवन का सबसे बड़ा हासिल होते है जो आपकी हर निराशा को हवा कर देते हैं। बुरे और अच्छे के द्वन्द से एक बेहतर व्यवस्था का निर्माण केवल सामाजार्थिक जीवन का ही सच नहीं है बल्कि आपके भीतर का सच भी है।  आपके भीतर की बुराई को अच्छाई से परास्त होना ही है। बेहतर का निर्माण होना ही है। चाहे जितनी घृणा,आतंक,अन्याय और शोषण व्याप्त हो अंततः प्रेम,एकता,समानता और अहिंसा ही बचनी है। आज भी जीवन में इतना कुछ अच्छा और सकारात्मक है जो अविश्वास और अनास्था के समय में बेहतर भविष्य के सपने देखने का होंसला देता है। इसी होंसले,विश्वास और आस्था के साथ समय के सतत प्रवाह के एक और पड़ाव में प्रवेश करने पर सभी यार दोस्तों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !


Tuesday, 23 December 2014



तेरी सांसें
सर्द रातों में
शोला बन
देह में कुछ पिघलाती रहीं

तेरी छुअन
तपती दोपहर में भी
बर्फ़ की मानिंद
मन में कुछ जमाती रही

ज़िंदगी बस यूँ ही
पिघलते और जमते
रफ्ता रफ्ता गुज़रती गई।