Tuesday, 24 May 2016

तमन्नाएँ





ये आसमान पर बिखरे तारे हैं

कि हमारी तमन्नाएँ

दिखते तो खूबसूरत हैं

पर हाथ नहीं आते।

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Thursday, 19 May 2016


ये क्या गजब हुआ
कयामत हो गई
और उन्हें पता ही नहीं चला
ना पहले सी नफरत रही
ना पहले सी मोहब्बत
इक वो हैं कि
उन पर कोई असर ही ना हुआ। 
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किसी का भाव निरपेक्ष हो जाना ही तो सबसे  बड़ी सज़ा है 


Sunday, 8 May 2016

टीम लीस्टर सिटी क्लब

                             

                                                                                                (गूगल से साभार)
                                    

 ये किसी परी कथा के किताबों से निकल कर हक़ीक़त में बदल जाने जैसा था। ये रात में देखे स्वप्न के सुबह होते -होते यथार्थ में बदल जाने जैसा था। ये कुछ कुछ अनहोनी के होनी में बदल जाने जैसा था। ये कुछ और नहीं एक क्लब का उसके 132 सालों के इतिहास में सबसे ऊंची पायदान पर पहुँच जाना था। ये विश्व के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबाल की सबसे लोकप्रिय और धनी बार्कले द्वारा प्रायोजित इंग्लिश प्रीमियर लीग के 2015-16 के सत्र को एक सबसे कमज़ोर मानी जाने वाली  टीम द्वारा जीता जाना था। ये टीम लीस्टर सिटी क्लब थी। ये टीम थी जिसने अपने 132 वर्षों के इतिहास में कोई ए डिवीजन लीग नहीं जीती थी। ये टीम थी जो पिछले  सत्र में ए डिवीजन से बाहर ही होने वाली थी यदि उसने अपने अंतिम नौ मैचों में से सात ना जीते होते। ये टीम थी जिसकी इस सत्र के शुरू होने पर सट्टा बाजार में बोली 5000 पर 1 थी। ये टीम थी जिसमें एक भी स्टार खिलाड़ी नहीं था। ये टीम थी जिसके ज्यादातर खिलाड़ी बी और सी डिवीज़न से या दूसरी टीमों द्वारा रिलीज़ हो के आए थे। पर ये टीम थी जिसने वो  कर दिखाया  जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। खेल का असली रोमांच ही वही होता है जब अनजानी,अनचीन्ही सी कोई टीम दिग्गजों को धूल चटाते नज़र आते हैं,उन्हें दिन में तारे दिखाते नज़र आते हैं। नीली जर्सी वाले खिलाड़ी कल शनिवार (7मई )की रात किंग पावर स्टेडियम में एवर्टन के विरुद्ध मैच के बाद चमचमाती ट्रॉफी को लेकर मैदान में जो जश्न मना रहे थे उसकी कल्पना उन्होंने खुद भी नहीं की होगी। उस गहराती रात में एक नए स्टार का उदय हो रहा था।एक नए चैंपियन का उदय हो रहा था। 
                           दरअसल ये खेल इतिहास की ये नई इबारत पिछले सोमवार (2मई )को ही लिखी जा  चुकी थी । उस दिन लंदन के स्टैमफोर्ड ब्रिज स्टेडियम में लीग की अंकतालिका में दूसरे स्थान पर रहने वाली टॉटेनहम हॉटस्पर और पिछली चैंपियन चेल्सी के बीच मैच खेला जा रहा था। इससे पहली रात को लीस्टर सिटी और मैनचेस्टर युनाइटेड के बीच 1-1 से ड्रा हुए मैच ने टॉटेनहम की टीम के शीर्ष पर पहुँचने की उम्मीदों को जीवित रखा था। इसी उम्मीद के भरोसे उन्होंने चेल्सी के विरुद्ध शानदार शुरुआत की।पहले हाफ में हैरी केन और सोन एच. मिन के गोलों की बदौलत 2-0 की बढ़त भी ले ली। लेकिन 58वें मिनट में गैरी काहिल ने बढ़त को कम कर दिया।  उसके बाद 83वें मिनट में इडेन हैजर्ड ने गोल कर चेल्सी को बराबरी पर ला खडा किया। ज़बरदस्त उत्तेजना से भरे इस मैच में कुल 12 पीले कार्ड दिखाए गए जिसमें से 9 टॉटेनहम के खिलाड़ियों के हिस्से आए। इस अनिर्णीत नतीज़े वाले मैच ने टॉटेनहम के सपने को तोड़ दिया था। जिस समय टॉटेनहम के खिलाड़ी हताश निराश  से मैदान से बाहर आ रहे थे ठीक उसी समय लीस्टरशायर के एक छोटे से शहर मेल्टेन मोब्रे में अब तक लीग के हीरो बन चुके जैमी वर्डी के घर मैच देखने जमा हुए लीस्टर के खिलाड़ी खुशी से झूम रहे थे।खेल इतिहास में अब तक के सबसे बड़े अपसेट में से एक हो चुका था। उत्सव आरम्भ हो चुका था। लीस्टर के किंग पावर स्टेडियम में हज़ारों लोग इस ऐतिहासिक क्षण को सैलीब्रेट कर रहे थे। 1992 से शुरू हुई इंग्लिश प्रीमियर लीग के  5 फेबुलस-आर्सेनल,मैनचेस्टर सिटी,मैनचेस्टर युनाईटेड,लीवरपूल और चेल्सी- के वर्चस्व को समाप्त करके एक नए और कुल मिला कर छठवें चैंपियन का उदय हो चुका था।

                                                      
                 ये जीत एक टीम की मेहनत,उसके ज़ज़्बे,उसके संघर्ष,उसके होंसले की जीत थी। ये उसके नए मैनेजर क्लॉडियो रेनीरी की जीत थी। जी हाँ ,ये रेनीरी की जीत भी थी।  ये रेनीरी ही थे जिहोंने टीम को पुनर्गठित किया ,टीम को एकजुट किया ,उसे होंसला दिया और जीत के लिए ज़रूरी जोश और ज़ज़्बा दिया। उन्होंने एक हताश निराश पराजित टीम को नए सिरे से संवारा। उन्होंने बी और सी डिवीज़न से अनेक प्रतिभावान खिलाड़ियों को लिया। तमाम दूसरी टीमों द्वारा रिलीज़ खिलाड़ियों का समावेश किया।  जिस समय लीस्टर सत्र की शुरुआत कर रही थी उस  समय उसके पास एक भी नामचीन खिलाड़ी नहीं था। उनके कप्तान वेस मॉर्गन ने 30 साल की उम्र तक एक भी ए डिवीज़न मैच नहीं खेला था। गोलकीपर कैसपर माइकल पिछले 5 वर्षों से बी और सी डिवीज़न लीग के बीच झूलता रहा था। अब तक लीग में 22 गोल दागने वाले  और लगातार 11 मैचों में  गोल करने का रिकॉर्ड बनाकर स्टार बने जैमी वर्डी बी डिवीज़न में खेल रहा था। जबकि डैनी सिम्पसन और डैनी ड्रिंकवाटर मैनचेस्टर यूनाइटेड द्वारा रिलीज़ किये गए थे तथा मार्क अल्ब्राइटन को एस्टन विला  ने रिलीज़ किया था। रेनीरी ने तमाम खिलाड़ियों की प्रतिभा को समझा,परखा और एक संगठित टीम तैयार की। 
                रेनीरी इटली से है। गैरी बाल्डी और मैज़िनी के देश से। दो महा नायक। इन दोनों ने अपनी दूरदर्शिता और योग्यता से 19वी सदी में छोटी छोटी रियासतों और भिन्न भिन्न भौगोलिक इकाइयों में बंटे इटली को एक सूत्र में पिरोया। सशक्त देश का निर्माण किया और  फिर उस को एक महाशक्ति बनाया। दो ऐसी शख्शियत जिनसे हर इटलीवासी आज भी प्रेरणा लेता है। निश्चित ही रेनीरी  ने भी जब लीस्टर के मैनेजर का पद संभाला और एक कमज़ोर हताश बिखरी टीम को देखा होगा तो उन्हें अपने उन दो महान पूर्वजों से प्रेरणा मिली होगी। जिसे लेकर उन्होंने एक नयी टीम का निर्माण किया। 
                             जब टीम में एकता होती है तो शक्ति होती है। शक्ति होती है तो साहस होता है। साहस होता है तो उम्मीदों के पर लग जाते हैं। पर होते हैं तो उड़ान संभव होती है। और जब उड़ान होती है तो सारा आसमाँ  उनका होता है। ये आसमाँ अब टीम लीस्टर का है।  नए चैंपियन का स्वागत।