Monday, 28 August 2017

विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप 2017

                       
विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप 2017
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                 कुछ मैचों को देखते हुए लगता है कि इसमें कोई हारा तो है ही नहीं,निर्णय हुआ ही कहाँ कि कौन श्रेष्ठ तो फिर ये ख़त्म क्यों हो गया,क्यों दो खिलाड़ी हाथ मिलाते हुए मैदान से विदा ले रहे हैं,एक मुस्कुराते चहरे और शहद से  मीठे पानी से डबडबाई आँखों के साथ तो दूसरा उदास चहरे और  खारे पानी में डूबी आँखें लिए।सच में,कुछ मैचों में  कोई हारता नहीं है।ऐसे में या तो दोनों खिलाड़ी जीतते हैं या फिर खेल जीतता है। कल रात जब ग्लास्गो के एमिरेट्स एरीना में विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप के महिला फाइनल में भारत के पुरसला वी सिंधु और जापान की नोजोमी ओकुहारा खेल रही थीं तो कुछ ऐसा ही घटित हो रहा था। रिकार्ड्स में भले ही ये दर्ज़ हो गया हो की इस मुक़ाबले में ओकुहारा ने सिंधु को 21-19,20-22,22-20 से हरा दिया, पर स्कोर देखेंगे तो पाएंगे कि ये मैच अधूरा रहा गया और अगली बार वे दोनों कोर्ट में जब भी आमने सामने होंगी तो ठीक वही से शुरू करेंगी जहाँ खेल कल रात अधूरा छोड़ा था।   
                       सिंधु और ओकुहारा बीच खेला गया ये मुक़ाबला अविस्मरणीय था जो अब तक खेले गए बैडमिंटन के सबसे शानदार चुनिंदा क्लासिक मुकाबले में से एक होगा। और इस प्रतियोगिता का तो निसंदेह सर्वश्रेष्ठ मैच ही होगा। एक सौ दस मिनट तक चला ये मैच प्रतियोगिता के इतिहास का सबसे लंबा मैच था जिसमें बैडमिंटन खेल अपनी सम्पूर्णता के साथ मौजूद था। हर तरह का आक्रमण,हर तरह  रक्षण,हर तरह का शॉट,हर तरह की रणनीति,जोश,जूनून,जज़्बा,धैर्य,मानसिक संतुलन ,मानवीय क्षमता और कौशल,तनाव सब कुछ अपने उच्चतम स्तर पर। संघर्ष का बेजोड़ प्रदर्शन।एक-एक अंक के लिए अनथक संघर्ष।हार ना मानने का संकल्प।परिणामस्वरूप लम्बी लम्बी रैलियां।दूसरे गेम के अंतिम अंक के लिए संघर्ष तो अविश्वसनीय था। इस रैली में 73 शॉट्स लिए गए जिसमें  वो सब कुछ था जो बैडमिंटन में हो सकता है। जोरदार स्मैशेस,शानदार प्लेसिंग और कुछ अविश्वसनीय रिटर्न्स। केवल ये एक रैली किसी भी खिलाड़ी को  बैडमिटन का पूरा खेल सिखाने  के लिए शायद पर्याप्त हो। 
                       अगर ये विश्व कप चीन के पराभव का विश्व कप था तो भारत के उभार का। पहली बार भारत ने इस प्रतियोगिता में दो पदक जीते। पिछले साल साइना ने सिल्वर मैडल जीता था। इस बार फिर शानदार प्रदर्शन कर सेमीफाइनल  पहुंची  कांस्य पदक पक्का किया। किदाम्बी भले ही पदक नहीं जीत पाए पर उनका प्रदर्शन उम्मीद जगाता है। निसंदेह आने वाले समय में बैडमिंटन में भारत बड़ी ताक़त होगी। इस बार पोडियम पर दो भारतीय खिलाड़ी थे। ये पहली बार था। और ये उम्मीद जगाता है।